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  • Mahesh Beldar

Karm Karo Fal Ki Chinta Mat Karo in Hindi - 1

कर्म करो फल की चिंता मत करो - श्रीमद भगवत गीता





गीता में ऐसा इसलिए कहा गया हे क्युकी फल प्राप्त करना हमारे हाथ में नहीं हे, हम सिर्फ कर्म कर सकते हे


कुछ लोग मन में फल की इच्छा लिए ही कर्म करते हे, वह कर्म पर तो ध्यान ही नहीं देते, की कर्म कैसा हो रहा हे.


जैसे एक व्यक्ति हे जो actor बनना चाहता हे, superstar बनाना चाहता हे, अभी उसे movie में छोटे मोटे role मिल रहे हे लेकिन वह उससे संतुष्ट नहीं हे, उसकी इच्छा हे की उसे movie में lead role मिले, मतलब की movie में जो main hero का role हे वह उसे मिले और इस इच्छा के चलते जो role उसे मिल रहे हे उसे भी वह ठीक तरह से नहीं निभा सकता,और इस वजह से जो role उसे मिल रहे हे वह भी एक एक कर बंध हो रहे हे.


मतलब की वह मन में केवल फल की इच्छा लिए ही कर्म कर रहा हे.


कर्म करो फल की चिंता मत करो, इसका अर्थ जो में समझ पा रहा हु वह यह हे की,

यदि हम कोई कर्म करेंगे फल की चिंता या इच्छा को side में रखकर वर्तमान पल में पूरी तरह उपस्थित रहकर पुरे focus के साथ तो वह काम perfect जरुर होगा, और यदि काम perfect होगा तो उसका फल भी perfect जरुर मिलेगा.

वर्तमान पल में मतलब पूरी तरह वर्तमान पल में उपस्थित, हम जहा हो हमारा पूरा ध्यान वहा पर ही होना चाहिए, फिर ऐसा नहीं की हम कर तो पढाई रहे हे या कुछ काम कर रहे हे लेकिन हमारे दिमाग में विचार चल रहे हे, मुझे friend के साथ शाम को movie देखने जाना हे, मुझे उसके पास पैसे लेने जाना हे, उसने मुझे ऐसा क्यों कहा था, उसने मुझे वैसा क्यों कहा था ऐसा नहीं, पूरी तरह, मतलब पूरी तरह वर्तमान में.


इस तरह यदि हम वर्तमान पल में पूरी तरह उपस्थित रहकर कोई काम करेंगे तो वह काम अच्छा जरुर होगा और उसके बाद हमे फल की चिंता करने की कोई आवश्कयकता नहीं रहेगी.


जो story मैंने आपको आगे कही उसमे उस व्यक्ति को movie में role तो मिल ही रहे थे, भले वह छोटे थे, यदि वह मन लगाकर, जो role उसे मिल रहे थे उसे निभाता, उसमे वह अपना सर्वस्व दे देता, तो वह acting जरुर अच्छी होती और लोगो को भी पसंद जरुर आती, यदि लोगो को पसंद आती तो अब तक तो उसे movie में छोटे मोटे role ही मिल रहे थे लेकिन बड़े role मिलने में भी देर नहीं लगती और वह धीरे धीरे superstar भी बना जाता.


Karm Karo Fal Ki Chinta Mat Karo Shreemad Bhagwat Geeta


इसलिए यदि कर्म पुरे focus और concentration के साथ, वर्तमान पल में पूरी तरह उपस्थित रहकर किया होगा तो उसके फल की चिंता करने की तुम्हे जरुरत नहीं हे, वह अच्छा जरुर मिलेगा.


कर्म ही ऐसा करो की भगवान् भी विवश हो जाए तुम्हे अच्छा फल देने के लिए.


यह बात उन सभी काम पर लागू होती हे जो अभी आप कर रहे हे, फिर वह चाहे कुछ भी क्यों न हो, पढाई हो, job हो, business हो या कुछ और.

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