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  • Mahesh Beldar

How to get rid of worrying thoughts

जो बात में आपको बताने वाला हु ऐसी बातो को लेकर आप भी जरुर परेशान होते होंगे?


में एक company में job करता हु, आज company में raw material की गाडी आई थी और वह raw material लकड़ी की पेटी में packed था, में उसे crane से उतरवा रहा था, जहा उतरवा रहा था वहा जगह बहोत कम थी, बाजू मे road था, material को road पर तो उतार नहीं सकते, जहा पर material उतरवा रहा था वहा पर ही हमारी office हे, में office की जो दिवार हे उसको सटाकर ही पेटी को रखवा रहा था, पेटी को दिवार के साथ में ही रखवा रहा था, मैंने crane के driver को पहले ही बोल दिया था की भाई सम्भाल कर करना, कही कुछ तोड़ बोड मत देना, लेकिन फिर भी crane के driver ने पेटी को उतारते समय office की दिवार को touch कर दिया और दीवाल को ऊपर से तोड़ दिया.


Company का जो security हे वह वही पर ही खड़ा था, उसने यह देखा और उसकी photo खीच ली, और उसने वह photo company के boss को भेज दी.


अब यह होने के बाद boss मुझे काफी कुछ सुनाएगा, मेरी salary काटने की बात करेगा, या crane वाले के bill से पैसे काटने की बात करेगा.


अब इसके बाद मेरे दिमाग में एक ही विचार बार बार चल रहा था की साला कल boss मुझे बहोत खरी खोटी सुनाएगा, मेरे पैसे काटने की बात करेगा या crane वाले के पैसे काटने को बोलेगा, यदि उसके भी पैसे काटे तो फिर वह भी दुबारा बुलाने पर जल्दी नहीं आएगा या आने में बहुत नाटक करेगा.





ऐसी बातो में हम न चाहते हुए भी परेशान हो जाते हे.


न चाहते हुए भी बार बार यही बात मेरे दिमाग में आ रही थी, कल क्या होगा?


How to get rid of worrying too much


फिर मेरे दिमाग में एकदम से एक विचार आया, साला परेशान होने का कोई फायदा हे? जो होना था वह तो हो गया, ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? मुझे एक दो बाते सुनाएगा, मेरी salary से पैसे काटेगा, क्रेन वाले के पैसे काटेगा, में तो crane चला नहीं रहा था, जो crane चला रहा था वह tension ले, में क्यों ले रहा हु, गलती उसने की हे तो उसके पैसे कटेंगे, उसको हमारे साथ business करना होगा तो आएगा, न आएगा तो हम कोई और दूंढ लेंगे, उस पर तो कोई चाँद लगा नहीं हे, मेरी salary से भी यदि पैसे काटे तो क्यों में एक दो हजार के लिए मेरा दिमाग खराब करू और जो हो ही गया हे उसमे तो कोई बदलाव होगा नहीं, अब जो बदलाव होगा वह मेरी सोच में ही होगा, या तो में इस बात को लेकर परेशान होता रहू या इस बात को side पर रख दू और सोचु की जो होगा वह देखा जाएगा.


हम ज्यादातर यही तो करते हे, हमसे कोई गलती हो जाती हे तो हम परेशान होना चालू हो जाते हे, एक ही बात हमारे दिमाग में बार बार आ रही होती हे, पता नहीं मेरा क्या होगा, वह मुझे क्या कहेगा, वह मेरे साथ क्या करेगा वगैरह वगैरह? हम जो सोचते हे वैसा और जितना सोचते हे उतना कभी होता हे क्या? हम कुछ ज्यादा नहीं सोचते?


और वैसे भी गलती की हे तो सजा तो मिलेगी, में चाहे परेशान होऊ या न होऊ सजा तो जरुर मिलेगी, जब मुझे सजा भुगतनी ही हे तो खाली पिली परेशान होकर अपना शिर दर्द क्यों बढ़ाऊ, जो होगा वह देखा जाएगा, मुझे मंजूर हे, जब आपने एकबार ऐसा बोल दिया तो आपकी परेशान गई.


इससे फायदा क्या हुआ? आप ने जब गलती की, आपको जब उस गलती की सजा मिलेगी, इन दोनों के बिच मे जो समय का फासला हे, उसमे जो आप परेशान होने वाले थे वह चीज खत्म हो गई.


बस आपको यहा तक सिमित नहीं रहना हे लेकिन आपको अपने आपसे एक सवाल पूछना हे की मैंने इस गलती से क्या सिखा? यदि आपने कुछ सिखा हे तो वह चीज गलती और गलती की सजा से बहुत बड़ी हे.


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